प्राइवेट जॉब में आरक्षण: इन 6 राज्यों ने लाया है प्राइवेट सेक्टर मे 75% आरक्षण, जाने कहाँ तक हो रहा अमल

Reservation In Private Job: देश के तमाम हिस्सों में इन दिनों बेरोजगारी की मार पड़ रही है। ऐसे में तमाम राज्यों में लगातार बेरोजगारी का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। यहीं वजह है कि देश की तमाम राजनीतिक गलियारों में बेरोजगारी का मुद्दा सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में चुनावी मैदान में उतरने वाली सभी पार्टियां बेरोजगारी के मुद्दे को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाती है। इतनी ही नहीं लोगों को सबसे पहले रोजगार का वादा देकर ही लुभाने का प्रयास करती है।

निजी नौकरी में मिलेगा 75% आरक्षण

वही अब बेरोजगारी के मुद्दे पर एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसके मुताबिक देश के 6 राज्यों में निजी नौकरी करने वाले 75% तक के स्थानीय लोगों को इन राज्यों की सरकार के द्वारा आरक्षण देने का ऐलान किया गया है। हालांकि बता दें कि इस नियम और प्रतिशत के आंकड़े को किसी भी राज्य में पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सकता है। कौन से है ये 6 राज्य जहां 75% तक स्थानीय लोगों को आरक्षण देने का ऐलान किया गया है, आइए हम आपको डिटेल में बताते हैं।

देश के 6 राज्य हरियाणा, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र और कर्नाटक में निजी नौकरियों में काम करने वाले 75% स्थानीय लोगों को आरक्षण देने का ऐलान किया गया है। हालांकि बता दे कि अब तक किसी भी राज्य में यह पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है, क्योंकि कहीं मामला कोर्ट में अटका है, तो कहीं निगरानी की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को इसका खास लाभ नहीं मिल पा रहा है।

झारखंड सरकार ने किया ऐलान

ऐसे में झारखंड सरकार की ओर से भी इसका ऐलान किया गया है कि जनवरी 2023 से निजी कंपनियों में 40 हजार तक की मासिक सैलरी वाले 75% पदों पर स्थानीय लोगों को नौकरी देना अनिवार्यता की श्रेणी में रखा जाएगा। इतना ही नहीं 10 से ज्यादा कर्मियों वाली लगभग सभी कंपनियों में इस नियम को अनिवार्यता के तौर पर लागू किया जा सकता है। साथ ही बता दें कि सरकार के इस नियम को ना मानने वाली कंपनी पर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

Reservation In Private Job

 

इन राज्यों के स्थानीय युवाओं के लिए सुनहरा मौका

ऐसे में अगर आने वाले समय में इन राज्यों में इस नियम को पूरी तरह लागू किया जाता है, तो इन राज्यों में रहने वाले स्थानीय युवाओं के लिए यह एक सुनहरा मौका साबित होगा, क्योंकि इस नियम की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां के स्थानीय लोगों को इसमें प्रायोरिटी लिस्ट पर रखा जाएगा। ऐसे में आइए हम आपको इस नए आरक्षण नियम के बारे में कुछ जरूरी बातें बताते हैं…

  • गौरतलब है कि सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले स्थानीय लोगों को इस आरक्षण नियम के तहत वरीयता दी जाएगी।
  • साथ ही कई राज्यों में तो रोजगार को लेकर अलग-अलग स्तर पर आंदोलन भी हो रहे हैं। ऐसे में अगर आरक्षण नियम लागू होता है तो यह इस तरह के आंदोलनों को खत्म करने की वजह बन सकता है।
  • यह बात तो सभी जानते हैं कि हर राज्य में जब भी चुनाव आते हैं तो सभी चुनावी पार्टियां अपने अपने घोषणापत्र में लाखों के रोजगार देने का वादा करती है। ऐसे में अगर यह नियम लागू होता है तो यह इन राज्य सरकारों के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।
  • इसके साथ ही युवा मतदाताओं पर भी यह आरक्षण नियम काफी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
  • बता दे इस आरक्षण नियम को लेकर एक तर्क यह भी है कि जब सरकारी क्षेत्र में आरक्षण दिया जा सकता है तो सरकार से तमाम तरह की छूट और टैक्स में लाभ के साथ-साथ सस्ते लोन की सुविधा हासिल करने के लिए प्राइवेट इंडस्ट्री इस तरह का कॉन्ट्रैक्ट क्यों नहीं कर सकती है।
  • प्राइवेट सेक्टर में ज्यादा से ज्यादा नौकरियां है, ऐसे में स्थानीय लोगों को प्राइवेट सेक्टर में ही नौकरी मिलने के ज्यादा चांसेस भी होते हैं। स्थानीय लोगों को अपने राज्य में प्रायोरिटी लिस्ट पर नौकरी रिक्रूटमेंट के दौरान रखना पलायन ना करने की वजह भी बन सकता है।

आरक्षण के विरोध में है काफी लोग

ऐसे में जहां इस आरक्षण के पक्ष में लाखों लोग हैं, तो वहीं इसके विपक्ष में खड़े लोगों का आंकड़ा भी कम नहीं है। इन लोगों का कहना है कि अगर स्थानीय लोगों को इतनी ज्यादा लेवल पर आरक्षण देने की अनिवार्यता प्राइवेट सेक्टर में लागू की जाती है, तो कुशल कर्मचारी नहीं मिल पाएंगे और कंपनी को इसका हर्जाना भरना पड़ सकता है और क्या कुछ है इसके विरोधियों की दलील… आइए हम आपको डिटेल में बताते हैं।

  • आरक्षण नियम को लागू करने को लेकर कई लोगों का कहना है कि कंपनियों के लिए दक्ष कर्मचारी मिलना मुश्किल हो सकता है।
  • इतना ही नहीं दूसरे राज्यों की और रुख यानी पलायन करने पर भी यह कंपनियां मजबूर हो सकती है।
  • इसके साथ ही निवेश घटने से कंपनी के साथ-साथ राज्य का आर्थिक विकास भी धीमा पड़ सकता है।
  • इस आरक्षण का विरोध करने वाले पक्ष के लोगों का यह भी कहना है कि यह लोगों के मौलिक अधिकार के भी खिलाफ है, जिसमें किसी भी नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में जाकर रोजगार करने की छूट मिलती है।
  • इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रखने की बंदिश में कंपनी को अधिक सैलरी भी देनी पड़ेगी। इसके अलावा ‘इज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ को इस आरक्षण नियम से बड़ा झटका लग सकता है और प्राइवेट इंडस्ट्रीज की आजादी भी इस आरक्षण नियम से छिन जाएगी।
  • इसके अलावा इस आरक्षण नियम का विरोध करने वाले पक्ष की यह भी दलील है कि स्थानीय और बाहरी कर्मचारियों के बीच ऐसे में कंपनी के अंदर तनाव भरा माहौल रहने की भी संभावना है, जो कि कंपनी पर बुरा प्रभाव डाल सकती है।

क्या कहता है सरकारी संविधान

  • ऐसे में इन 6 राज्यों में लागू होने वाले इस आरक्षण नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दलील देते हुए कहा था कि रहने की जगह के आधार पर दिया गया आरक्षण आर्टिकल 15 का उल्लंघन नहीं करता है, क्योंकि जन्म स्थान और रहने की जगह में अंतर आर्टिकल 15 (1) और आर्टिकल 15 (2) में जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव करने की मनाही नहीं है और साथ ही रहने की जगह को लेकर भी कोई रोक तो नहीं है।
  • वहीं दूसरी और हरियाणा सरकार द्वारा निजी नौकरी में 75% के स्थानीय लोगों के आरक्षण कि फैसले को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया था। हालांकि बाद में राहत दे दी गई, लेकिन अभी भी यह केस लंबित है।
  • वह इस मामले पर जानकारों का कहना है कि कोर्ट को आरक्षण का कोई तर्कसंगत दायरा तय करना होगा, ताकि स्थानीय और बाहरी दोनों वर्ग के लोगों को आरक्षण के बीच संतुलन मिल सके।